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इंडियन प्लांड लीग

Posted On: 24 May, 2013 Others में

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इंडियन प्लांड लीग
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ये फिक्सिंग पकड़ने वालों को भी भैया ना जाने कौन सा कीड़ा काट लेता है कभी कभी जो अचानक उछलकर फिक्सिंग पकड़ने लग जाते हैं . फिक्सिंग पकड़ना भी कहीं फिक्स तो नहीं है . अच्छे खासे लोग रोज शाम को नहा धोकर टीवी के आगे बैठकर इंडियन प्लांड लीग का आनंद ले रहे थे कि ये फिक्सिंग पकड़ने वाले ना जाने कहाँ से आ धमके सी आई डी की टीम की तरह और बे मतलब इसको उसको पकड़ने लग गये बिल्कुल वैसे ही जैसे बदर और आवारा पशु पकड़ने वाले कैटल दस्ते आकर आठ दस जानवर पकड़ते हैं और बाकी सबको उसी तरह छोड़ देते हैं . अब भैया पकड़ना ही है तो सारे जानवर पकड़ो वरना ना पकड़ो. उन्हीं आठ दस ने कोई पाप किये हैं क्या ? आदमी रोज शाम को दफ्तर से थका मांदा घर वापस आता है . चार पाँच घटे चीयर बलाओं मेरा मतलब है बालाओं को देखता है तो उसकी सारी थकान एक मिनट में दूर हो जाती है. वो खुद घर में गिलास लेकर चियर करता है और अगले दिन दफ्तर में दिन भर चियरफुली काम करता है. जाकर देखो तो सही कि दफ्तरों में कितना आउट पुट बढ़ गया है. अरे भइया क्या चीज नहीं फिक्स है इस दुनिया में ? आदमी पैदा होगा यह फिक्स नहीं है पर भगवान ने उसकी मौत को फिक्स कर रखा है तो जाओ पकल्लो भगवान को जाकर कि काहे मौत फिक्स करी हुयी है ससुरी. सरकार योजनाओं की घोषणा तो कर दे देती है पर उनको शुरु नहीं करेती यह भी फिक्स है. जो भी नेता सत्ता में हाथ जोड़कर आयेगा वो घोटाला ही करेगा यह फिक्स नहीं है क्या ? मंहगाई बढ़ेगी यह भी फिक्स है. आम वाले भइया अनशन करेंगे यह भी फिक्स है और सरकार उनकी एक नहीं सुनेगी यह भी फिक्स है.
अगर मैच फिक्स नहीं हुये और चेन्नई की जगह दिल्ली डेयर डीविल्स की टीम ने बड़ा वाला गिलास हवा में लहरा दिया तो हमे कोई फर्क पड़ जायेगा क्या ? अगर हसी की जगह सहवाग ऑरेंज कैप पहन लेगा तो टोपी का रंग हरा हो जायेगा क्या ? यार तौलिया तो मै भी लगाता हू नहाने से पहले और मेरी बीवी इशारा समझ जाती है कि मैं नहाने जा रहा हं. पर मेरा नहाना कभी फिकस नहीं होता. कई बार तो मै तौलिया लगाकर काफी देर इधर उधर घूमता हूं और फिर सोचता हूं कि छड यार रोज रोज की नहाना. फिर अगर किसी संत ने तौलिया लगा लिया तो आपने उसको घर लिया बिना बात के. इसलिये भईया तौलिया लगा लेने से ही ना तो नहाना ही फिक्स होता है ना ही कोई मैच.
फिर भी अगर आपको समझ में नहीं आता है और आप बताते रहोगे कि फलाना मैच फिक्स था ढिमाका मैच फिक्स था तब भी हम रोज शाम को नहा धोकर टीवी के आगे बैठकर देखते ही रहेंगे. मैच तो क्या हम तो उनकी हाईलाइट भी पूरे संकल्प और निष्ठा के साथ देखेंगे . देखते हैं कौन हमारा क्या बिगाड़ लेता है. सारे सीरियल फिक्स हैं नकली हैं, सारे न्यूज़ चैनल फिक्स है. लगता है न्यूज़ नहीं दिखा रहे हैं किसी खास पार्टी का प्रचार कर रहे है़. टीवी के सारे धर्मगुरु फिक्स हैं. सब दिन भर उपदेशों की उल्टियां करते रहते है और शाम को उनका सैक्स वीडियो जनता देख रही होती है. हम अगर सब कुछ तुम्हारे कहने से देखना छोड़ दें तो फिर हम तो अगले दिन ही मर जायेंगे. इसलिये बंद करो अपनी फिक्सिंग पकड़ने की फिक्सिंग और हटो टीवी के सामने से चीयर गर्ल्स को देखकर बीयर पीकर चीयर करने दो. बड़ी मुश्किलो से तो देखने को मिलती हैं साल में एक बार.
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उमेश मोहन धवन
पता 13 / 134 परमट, कानपुर 208001 उ.प्र.
e-mail um.dhawan@yahoo.com

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